मंत्रालयों की राजभाषा कार्यान्वयन समितियां

सूचना अधिकार अधिनियम 2005 वीडियो लिस्टिंग आदेश / पत्र / परिपत्र प्रशिक्षु सहभागिता केंद्रीय मंत्रालयों से सहभागिता विभाग से संवाद Public Grievance : External website that opens in a new window
श्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री
श्री किरेन रीजीजू, गृह राज्य मंत्री
प्रशिक्षण
हिंदी में काम करना आसान है

सूर्यकांत त्रिपाठी निराला (21 फरवरी,1899 - 15 अक्‍तूबर, 1961)

हिंदी साहित्य में स्वच्छन्द, निर्भीक, विद्रोही और क्रांतिकारी तेवर से अपनी विशिष्ट पहचान बनाने वाले पं. सूर्यकांत त्रिपाठी निराला का जन्म बंगाल के मेदिनीपुर जिले की भूतपूर्व रियासत महिषादल में हुआ था । उनकी काव्‍य प्रतिभा केवल छायावाद तक ही सीमित नहीं थी, अपितु प्रगतिवाद और प्रयोगवाद तक भी वे उनकी काव्य प्रतिभा पूरी शिद्दत से पहुंची । वे मूलत: कवि थे लेकिन साथ ही उन्‍होंने कहानियां और रेखाचित्र भी लिखे हैं हिंदी जगत ने सर्वसम्मति से स्वीकार किया कि वे हिंदी के गौरव हैं। प्रमुख रचनाएं हैं : तुलसीदास, राम की शक्‍ति पूजा, सरोज स्‍मृति, अनामिका, गीतिका, परिमल, नये पत्‍ते, बेला, अर्चना, आराधना, गीत गुंज, कविश्री, सांध्य काकली, अप्‍सरा, अलका, निरुपमा, प्रभावती, चोटी की पकड़, काले कारनामे, चतुरी चमार, सुकुल की बीवी, लिली एवं देवी।

नरेन्‍द्र शर्मा (28 फरवरी, 1913 - 11 फरवरी, 1989)

सुमित्रा नंदन पंत ने नरेन्‍द्र शर्मा को प्रेमकाव्‍य का अनछूआ राजकुमार कहा था । जिस समय पं. नरेन्‍द्र शर्मा ने कविता लिखनी शुरू की, वह छायावाद के उत्‍कर्ष का काल था। उन्‍हें छायावाद और प्रगतिवाद के संधियुग की काव्‍यधारा का प्रतिनिधि कवि माना जाता है । उनकी कविताओं में नारी है, प्रकृति है, वैयक्‍तिकता और सामाजिकता है; साथ ही दर्शन और अध्‍यात्‍म भी है । नरेन्‍द्र शर्मा का जन्‍म उत्‍तर प्रदेश के पश्‍चिमी भाग के एक गांव जहांगीरपुर में हुआ था । उन्‍होंने 50 से अधिक फिल्‍मों में 650 से अधिक गीत लिखे । प्रमुख रचनाएं हैं:  शूल-फूल, कर्ण-फूल, प्रभात फेरी, प्रवासी के गीत, पलाश-वन, मिट्टी और फूल, लाल निशान, हंसमाला, रक्‍त-चंदन, अग्‍निशस्‍य, कदली-वन, बहुत रात गए, मुठ्ठी बंद रहस्‍य, कामिनी, द्रौपदी, उत्‍तर जय, सुवर्णा, सुवीरा एवं मोहनदास करमचंद गांधी ।