केंद्रीय हिंदी प्रशिक्षण संस्थान/हिंदी शिक्षण योजना

भारत सरकार, गृह मंत्रालय, राजभाषा विभाग के एक अधीनस्थ कार्यालय के रुप में हिंदी शिक्षण योजना एवं केंद्रीय हिंदी प्रशिक्षण संस्थान द्वारा देशभर में हिंदी भाषा, हिंदी टंकण एवं हिंदी आशुलिपि के प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं । ये कार्यक्रम केंद्र सरकार के कर्मचारियों के साथ-साथ भारत सरकार के नियंत्रणाधीन उपक्रमों, निकायों, निगमों एवं बैंकों के कर्मचारियों के लिए संचालित किए जा रहे हैं ।

प्रशिक्षण कार्यक्रम पूर्णकालिक केंद्रों के साथ-साथ अंशकालिक केंद्रों पर भी संचालित किए जा रहे हैं ।

प्रशिक्षण कार्यक्रमों के प्रकार

देश भर में चार प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं :-

1.  कार्यालय समय में पूर्णकालिक एवं अंशकालिक केंद्रों पर प्रशिक्षण ।

2. पत्राचार के माध्यम से हिंदी भाषा एवं हिंदी टंकण का प्रशिक्षण ।

3. हिंदी भाषा, हिंदी टंकण और हिंदी आशुलिपि का गहन पूर्णदिवसीय प्रशिक्षण ।

4. इंटरनेट के माध्यम से वेब पर लीला प्रबोध, लीला प्रवीण एवं लीला प्राज्ञ पाठयक्रमों का स्वयं शिक्षण

क्षेत्रीय कार्यालय एवं उप संस्थान

प्रशिक्षण कार्यक्रमों को सुचारु रुप से संचालित करने के लिए दिल्ली, मुम्बई, कोलकाता, चेन्नै एवं गुवाहाटी में पांच क्षेत्रीय कार्यालय और मुम्बई, कोलकाता, हैदराबाद, बैंगलूर और चेन्नै में उप संस्थान स्थापित किए गए हैं ।

हिंदी प्रशिक्षण की स्थिति

वर्तमान में देशभर में हिंदी भाषा प्रशिक्षण के 118 पूर्णकालिक, 14 अंशकालिक केंद्र तथा हिंदी टंकण/आशुलिपि के 22 पूर्णकालिक एवं 21 अंशकालिक प्रशिक्षण केंद्र संचालित हैं । इस प्रकार पूरे देशभर में कुल 175 प्रशिक्षण केंद्रों द्वारा हिंदी का प्रशिक्षण दिया जा रहा है ।

नए आयाम

1.  पूर्वोत्तर क्षेत्र में हिंदी प्रशिक्षण की बढ़ती मांग को देखते हुए गुवाहाटी में हिंदी शिक्षण योजना को एक नया क्षेत्रीय कार्यालय स्थापित किया गया है तथा इंफाल, आईजॉल एवं अगरतला में पूर्णकालिक प्रशिक्षण केंद्र खोले गए हैं ।

2. देश के अधिकांश टंकण/आशुलिपि प्रशिक्षण केंद्रों पर कंप्यूटरों द्वारा टंकण का प्रशिक्षण दिया जा रहा है ।

3. पुनर्रचित प्रबोध पाठ्यक्रम जनवरी, 2006 से हिंदी शिक्षण योजना एवं केंद्रीय हिंदी प्रशिक्षण संस्थान/उपसंस्थानों के गहन पाठ्यक्रम में लागू कर दिया गया है । हिंदी प्रबोध पुस्तिका को नई तकनीक एवं पद्धति के आधार पर पुनर्रचित किया गया है ।

4. पुनर्रचित प्रवीण पाठ्यक्रम जनवरी, 2009 से ।

5. इसी क्रम में पुनर्रचित प्राज्ञ पाठ्यक्रम मुद्रण की प्रक्रिया में है शीघ्र ही इसे भी लागू कर दिया जाएगा ।

    6.  कार्यक्रमों में पारदर्शिता लाने के लिए प्रशिक्षण कलैण्डर एवं परीक्षा   परिणामों  को इंटरनेट पर उपलब्ध करा दिया गया है ।